सन्नाटे की गूँज
माया की ज़िंदगी एक खाली कमरे की तरह थी—चुपचाप, उदास और अकेली। तीस साल की हो चुकी थी वह, लेकिन शादी का ख्याल उसके मन के किसी कोने में दफन हो चुका था। वह एक छोटे से सरकारी दफ्तर में क्लर्क थी, जहाँ उसका पूरा दिन पीली पड़ चुकी फाइलों को उलटने-पलटने और धूल झाड़ने में बीत जाता। ऑफिस के लोग उसे 'मशीन' कहते थे क्योंकि वह न किसी से हँसती थी, न कोई सहेली थी।
शाम ढलते ही वह अपने उस पुराने फ्लैट की ओर चल देती, जो शहर के एक ऐसे कोने में था जहाँ वक्त जैसे थम गया था। वहाँ की सड़कें संकरी थीं और स्ट्रीट लाइटें अक्सर टिमटिमाती रहती थीं। माया का फ्लैट तीसरी मंजिल पर था। घर पहुँचते ही वह सबसे पहले सारे दरवाजे लॉक करती। उसका अकेलापन उसे काटता नहीं था, बल्कि उसने अकेलेपन से दोस्ती कर ली थी।
पर वह रात कुछ अलग थी। डिनर के बाद जब वह अपनी बालकनी वाली खिड़की के पास खड़ी हुई, तो बाहर का सन्नाटा उसे कुछ ज्यादा ही गहरा लगा। अचानक, उसकी नज़र नीचे आँगन के कोने में पड़ी। वहाँ एक लंबा, काला साया खड़ा था। माया की साँसें अटक गईं। उसने सोचा शायद कोई पेड़ होगा, पर उस आँगन में तो कोई पेड़ था ही नहीं। वह साया बिलकुल स्थिर था, जैसे कोई पत्थर की मूर्ति हो, और उसकी अदृश्य आँखें सीधे माया की खिड़की की ओर थीं।
मध्य: साये की बढ़ती नज़दीकियां
जैसे-जैसे दिन बीतते गए, वह साया हर रात ठीक दस बजे प्रकट होने लगा। माया ने खुद को समझाने की बहुत कोशिश की। "शायद यह मेरा वहम है," वह खुद से बुदबुदाती। पर वह वहम नहीं था। साया हर रात एक कदम आगे बढ़ जाता। पहले वह आँगन के कोने में था, फिर वह टूटे हुए फव्वारे के पास आया, और अब वह माया की खिड़की के ठीक नीचे वाली दीवार तक पहुँच चुका था।
माया की रातों की नींद उड़ गई थी। ऑफिस में वह फाइलों पर दस्तखत करते-करते चौंक जाती। उसे लगता जैसे कोई उसके कंधे के पीछे खड़ा है। उसकी सहेली रीता ने एक दिन टोका, "माया, तुम्हारी आँखों के नीचे ये काले घेरे कैसे? क्या सोती नहीं हो?"
माया ने कांपती आवाज़ में बताया, "रीता, कोई है जो रोज़ रात को मेरा इंतज़ार करता है। वह साया... वह मुझे बुलाता है।"
रीता खिलखिलाकर हँस पड़ी, "शहर का प्रदूषण और काम का तनाव दिमाग पर चढ़ गया है तुम्हारे। छुट्टी लो और कहीं घूम आओ।"
लेकिन उस रात जब माया ने हिम्मत जुटाकर अपने पुराने मोबाइल से वीडियो बनाने की कोशिश की, तो स्क्रीन पर सिर्फ गहरा काला अंधेरा दिखा। साया आँखों से दिख रहा था, पर कैमरे में नहीं। माया का दिल जोर-जोर से धड़कने लगा। उसने पुलिस को फोन किया। जब कांस्टेबल आए और उन्होंने टॉर्च की रोशनी चारों तरफ घुमाई, तो वहाँ सिर्फ सूखी घास और कीचड़ था। पुलिस वाले उसे 'सनकी' समझकर चले गए। माया उस रात अपने कमरे के कोने में दुबककर रोती रही। वह साया अब खिड़की के कांच पर अपनी लंबी उंगलियों जैसी परछाईं फिरा रहा था।
मोड़: तूफानी रात और पुराना सच
उस रात आसमान का मिजाज बदला हुआ था। बादल गरज रहे थे और बिजली ऐसे कड़क रही थी जैसे आसमान के सीने में कोई दरार पड़ गई हो। माया अपने बिस्तर पर चादर ओढ़े काँप रही थी। अचानक उसे अपने बेडरूम के दरवाजे पर किसी के दस्तक देने की आवाज़ सुनाई दी। ठक... ठक... ठक...
माया की हिम्मत जवाब दे गई। उसने एक टॉर्च उठाई और चिल्लाई, "कौन है? बाहर निकलो!" कोई जवाब नहीं आया। उसने झटके से दरवाजा खोला और सीढ़ियों से नीचे आँगन की तरफ भागी। बारिश उसे भिगो रही थी, हवा के थपेड़े उसे पीछे धकेल रहे थे, लेकिन आज वह इस डर का अंत करना चाहती थी। "कहाँ हो तुम? सामने आओ!" वह पागलों की तरह चीखी।
अचानक एक बिजली कड़की और एक पल के लिए पूरा आँगन रोशनी से भर गया। साया गायब था। लेकिन जहाँ वह साया खड़ा होता था, वहाँ ज़मीन पर कीचड़ के बीच कुछ चमक रहा था। माया ने झुककर उसे उठाया। वह एक फटी हुई, पुरानी ब्लैक एंड व्हाइट फोटो थी।
रहस्य का खुलासा: 1970 की यादें
माया उस फोटो को लेकर अंदर आई। जैसे ही उसने टॉर्च की रोशनी फोटो पर डाली, उसके हाथ से टॉर्च गिरते-गिरते बची। फोटो में एक लड़की थी—हुबहू माया जैसी। वही तीखी नाक, वही उदास आँखें। लेकिन उसके कपड़े 1970 के दशक के थे। वह एक लंबे कद के नौजवान के साथ खड़ी थी, जिसका चेहरा फोटो फटने की वजह से गायब था। पीछे वही पुराना फ्लैट दिख रहा था, जो उस वक्त नया और खूबसूरत था।
अचानक माया के दिमाग में धमाका हुआ। उसे कुछ धुंधली यादें आने लगीं—पुराने गानों की आवाज़, मोगरे के फूलों की खुशबू, और एक दर्दनाक चीख। उसे याद आया कि वह इस घर में पहली बार नहीं रह रही है। वह साया कोई अजनबी नहीं था। वह 'आर्यन' था—उसका प्रेमी, जिससे उसने 50 साल पहले इसी घर में शादी का वादा किया था। एक तूफानी रात को एक हादसे ने उन्हें जुदा कर दिया था, और आर्यन का शरीर कभी नहीं मिला।
अंत: अधूरा इंतज़ार
अगली सुबह माया ने ऑफिस से इस्तीफा दे दिया। अब वह डरती नहीं थी। उसने उस पुरानी फोटो को अपने सिरहाने रख लिया। उसे समझ आ गया था कि उसका अकेलापन क्यों था—वह आधी सदी से किसी का इंतज़ार कर रही थी।
रात के दस बजे। माया ने खिड़की खोली। साया वहीं खड़ा था। माया ने अपना हाथ खिड़की से बाहर निकाला। साये ने भी अपना लंबा, धुंधला हाथ ऊपर उठाया। दोनों के हाथ एक-दूसरे को छू नहीं पाए, लेकिन एक ठंडी लहर माया के शरीर से होकर गुजरी। उसे लगा जैसे किसी ने उसके कान में धीरे से कहा हो— "इस बार... मैं तुम्हें नहीं जाने दूँगा।"
माया मुस्कुराई, उसकी आँखों से आँसू गिर रहे थे। पर क्या वह साया उसे लेने आया था या उसे चेतावनी देने? और वह फोटो किसने वहाँ रखी? क्या कोई और भी है जो इस राज़ को जानता है?
क्या माया उस साये के साथ चली जाएगी? क्या आर्यन की मौत एक हादसा थी या कत्ल? अगर आप इस रहस्य की गहराई में उतरना चाहते हैं, तो कमेंट में 'YES' लिखें ताकि मैं भाग 2 लेकर आ सकूँ!